December 18, 2014

सांप्रदायिकता फैलाने वालों को विरोध करते समय प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र तथा परिवर्तनकामी छात्र संगठन के साथ किया गया दुर्व्यवहार और मार-पीट



लालकुआँ (नैनीताल), उत्तराखण्ड -  16 दिसंबर को एक लड़का और लड़की के घर से चले जाने के की घटना को हिंदुत्ववादी संगठनों के सांप्रदायिक रंग देने की पूरी कोशिश की क्योंकि लड़का मुस्लिम था और लड़की हिंदु। लड़की के घर वालों ने लड़के पर अपहरण का केस दर्ज कराया जिसको पुलिस ने दर्ज कर लिया लेकिन लड़के के परिजनों द्वारा अपने लड़के की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाने पर पुलिस ने गुमशुदगी भी दर्ज नहीं की। इसी बीच ऐसे मुद्दों की ताक में बैठे रहने वाले सांप्रदायिक संगठन (आर.एस.एस, बजरंग दल, भाजपा और एबीवीपी) अपने पूरे दम खम से इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने और मुस्लिमों के खिलाफ जहर उगलने में मशगूल हो गए। उन्होंने जुलूस निकालकर, कोतवाली का घेराव कर डीएम से मिलकर अपनी सक्रियता का प्रदर्शन किया।  इससे पूर्व लालकुंआ में ही 7 वर्षीय बालिका चंचल के गुम होने पर हमारे द्वारा किए गए आंदोलन के दौरान निमंत्रण देने के बाद भी एक भी दिन संगठनों के नेताओं/कार्यकर्ताओं ने अपनी शक्ल तक भी नहीं दिखाई। असल में यही पाखंड ही इन का चरित्र है।

14 दिसंबर में इन संगठनों ने सभी राजनीतिक दलों के साथ मिलकर महिला सुरक्षा के नाम पर एक महापंचायत का आयोजन किया जिसका प्रचार पूरे इलाके भर में माईक से किया गया। यह जानते हुए कि इस मुद्दे को लेकर शहर में पहले ही काफी तनाव है, पुलिस प्रशासन ने इन महापंचायत को नहीं रोका। महापंचायत में परिवर्तनकामी छात्र संगठन व प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र के कार्यकर्ता भी पहुंचे। महापंचायत में मुस्लिमों के खिलाफ जमकर जहर उगला गया। आर.एस.एस और भाजपा के नेताओं से आगे बढ़कर सपा के जिलाध्यक्ष संजय सिंह अपनी कट्टरपंथी और सांप्रदायिक सोच का मुझाहिरा कर रहे थे। वे अपने को आर.एस.एस और भाजपा से भी बड़ा सांप्रदायिक राजनीति का चैंपियन घोषित करना चाह रहे थे। संजय सिंह ने कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होने पर हमें दंगा मंजूर है जिससे हमारे हिंदु समाज का सर गर्व से ऊंचा उठा रहे। आर.एस.एस के नेता राधेश्याम यादव ने कहा कि हिंदू समाज का सर शर्म से ना झुके इसके लिए जरूरी है कि हिंदू समाज का सर शर्म से ना झुके इसके लिए जरूरी है कि उस लड़के को लालकुंआ में कदम न रखने दिया जाए। बजरंग दल के नेता ने कहा कि हिंदू लड़कों द्वारा मुस्लिम लड़कियों से शादी करने पर उनको कोई नहीं पूछता सब मुस्लिमों को पूछते हैं। इसलिए हमें एक ऐसा हिंदू कोष बनाना चाहिए ताकि ऐसे लड़कों पर उससे खर्च किया जा सके। ये बातें तो खुलेआम 400 लोगों के बीच कही जा रही थी। सुनने मे ये भी आ रहा है कि कई गुप्त बैठकें शहर में की गईँ। उनमें कितना जहर उगला गया होगा इसकी कल्पना की जा सकती है।

December 15, 2014

प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र एवं परिवर्तनकामी छात्र संगठन ने पंचायत को खाप पंचायत का दर्जा दिया



लालकुआँ में एक लड़के व लडकी के गायब हो जाने के कारण हिन्दुत्तववादी संगठनों ने एक महापंचायत बुलाई थी। जिसमें क्षेत्र के लोगों को बुलाया था। महापंचायत में RSS ,बजरंगदल इनके अन्य हिन्दुत्तववादी संगठनों के सैकड़ों लोग शामिल थे। महापंचायत में प्रगतिशील महिला एकता  केन्द्र एवं परिवर्तनकामी छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं को भी बुलाया था। प्रगतिशील महिला एकता  केन्द्र की बिंदु गुप्ता ने कमेटी गठन के सुझाव का विरोध इस तर्क के साथ किया कि छात्रा और युवक दोनों की राय जाननी जरूरी है। इस सवाल पर महापंचायत में मौजूद अधिकतर लोगों ने सुझाव का विरोध कर दिया। जिसके बाद प्रगतिशील महिला एकता  केन्द्र एवं परिवर्तनकामी छात्र संगठन  ने पंचायत को खाप पंचायत का दर्जा दिया। उनके ऐसा करते ही महापंचायत में RSS, बजरंगदल इनके अन्य संगठनों के सैकड़ों लोगों ने प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र एवं परिवर्तनकामी छात्र संगठन के 4 कार्यकर्ताओं पर पंचायत के दौरान महिला साथियों के साथ धक्का-मुक्की व अभर्द्ता की पछास के पुरुष साथी के साथ मारपीट की   क्योंकि यह लोग इनकी पूरी ही झूठ पर टिकी राजनीति का पर्दाफाश कर रहे थे। सभी न्याय प्रिय व संवेदनशील साथियों से अपील है की इनका विरोध करें।

दिनांक 14 -12 - 2014 को अमर उजाला दैनिक समाचार पत्र में छपी रिपोर्ट 

महापंचायत में ‘महाभारत’

Updated @ 5:30 AM IST
लालकुआं (नैनीताल)। छात्रा को अपहृत करने वाले आरोपी युवक पर कार्रवाई की मांग और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने को लेकर रविवार को बुलाई गई महापंचायत ‘महाभारत’ में बदल गई। घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कमेटी बनाने के सुझाव का परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछासं) और प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के कार्यकर्ताओं ने विरोध कर दिया। खूब हंगामा किया गया।
शुरूआत में दो घंटे चली बैठक में पुलिस-प्रशासन से मांग की गई कि स्कूलों और कोचिंग सेंटरों से आते-जाते वक्त छात्राओं का पीछा करने वाले मनचलों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। गौला रोड, ट्रांसपोर्टनगर और राजकीय इंटर कालेज क्षेत्र में सादी वर्दी में महिला पुलिस-पुरुष पुलिसकर्मियों को तैनात करने पर जोर दिया गया। लोगाें ने छात्रा को भगाकर ले जाने वाले युवक के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। कहा कुछ बाहरी लोग क्षेत्र में बिना सत्यापन यहां की फि जा बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए कमेटी के गठन का सुझाव दिया गया।
इसी बीच प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की बिंदु गुप्ता ने कमेटी गठन के सुझाव का विरोध इस तर्क के साथ किया कि छात्रा और युवक दोनों की राय जाननी जरूरी है। इस सवाल पर महापंचायत में मौजूद अधिकतर लोगों ने सुझाव का विरोध कर दिया। महिला एकता केंद्र की ज्योति गुप्ता और पछासं के महेश ने पंचायत को खाप पंचायत का दर्जा देते हुए हंगामा शुरू कर दिया। मामला बिगड़ता देख मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने दो गुटों में बंटे लोगों को समझा बुझाकर महापंचायत समाप्त करने के निर्देश दिए।
महापंचायत में प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष अशोक अग्रवाल, देवभूमि व्यापार मंडल अध्यक्ष शेखर उपाध्याय, नगर कांग्रेस अध्यक्ष गुरदीप सिंह, महामंत्री गुरदयाल मेहरा, भाजपा महामंत्री पवन चौधरी, शेखर जोशी, चौधरी सर्वदमन सिंह, सभासद राजकुमार सेतिया, धन सिंह बिष्ट, लक्ष्मण खाती, महेश चौधरी, बलवंत खुराना, सपा जिलाध्यक्ष संजय सिंह, बिंदु गुप्ता, महेश चंद्र, दयानाथ प्रजापति, राजीव पंडित, मनीष अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में नगर के लोग मौजूद थे। संचालन समाजसेवी जीवन कबडवाल ने किया। वहीं, समापन के बाद कुछ लोगों ने पछासं और प्रगतिशील महिला एकता केंद्र कार्यकर्ताओं पर क्षेत्र की शांति भंग का आरोप लगाया तो पछासं के महेश ने कुछ युवकों पर मारपीट का आरोप लगाया है।





December 3, 2014

भोपाल गैस त्रासदी

भोपाल गैस त्रासदी को आज 30 साल हो गए।  लेकिन भोपाल के लोगों की न्याय के लिए जिद आज भी जारी है।  20,000  से ज्यादा लोगों के हत्यारे यूनियन कार्बाइड के मालिकों और अधिकारियों को इस मामले में केवल 2 वर्ष की सजा सुनाई जबकि उनमें से किसी को भी आज तक एक भी दिन जेल में नहीं रहना पड़ा।  और आज BJP के दिग्गज नेता और बड़बोले प्रधान मंत्री विदेशों में घूम-घूम कर दुनिया को न्यौता दे रहे हैं की हमारे यहाँ आओ, कंपनी खोलो और मुनाफा लूटो इतना सस्ता और अधिक मज़दूर आपको केवल भारत और केवल भारत में ही मिल सकते हैं।   यूनियन कार्बाइड भी एक विदेशी अमेरिकन कंपनी थी।  जिसे DOW CHAMICAL   ने खरीद लिया था।  और दोनों कंपनियां अब उस दुर्घटना की हर जिम्मेदारी से बचना चाहती हैं। 

दूसरी तरफ फैक्ट्रियों-खदानों-कारखानों में काम  करने वाले मज़दूर और जनवादी और प्रगतिशील जनता हैं जो अपने हकों के लिए लड़ती हैं भारत सरकार उन्हें देश में निवेश और शांति व्यवस्था के नाम पर जेलों में ठूंस देती है। मारूति के कबाड़ में लगी आग में दम घुटने की वजह से एक HR मैनेजर की मौत की पुष्टि मैनेजर की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में हो चुकी है।  उसके बावजूद मारुती के 147  मज़दूर हैं जो बिना किसी कसूर  के 2 साल से  जेल में बंद हैं।  जिनको एक दिन की भी बेल  नहीं दी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट कहता है कि उनको छोड़ने से  विदेशी निवेश प्रभावित होगा।  

March against communalism

Joint Appeal

Join Hands to Make ‘Sampradayikta Virodhi March’ a Grand Success !

Date: 6th December, 2014, Time: 11 AM
Assembly Place: Mandi House, Delhi



Dear Friends,

In the current phase of corporate-communal offensive under Narendra Modi regime, 6th December 2014 has an exceptional implication. We have been remembering the date (when the historical Babari Masjid was demolished by the Hindutva forces in 1992) not only as solidarity to the minority Muslim community, but also as a challenge to defend secularism and diversity of the country.

During the last six months well planned and consolidated attacks on minority communities (especially Muslims) and democratic-forces have intensified to a great extant. Hindutva forces are going all-out to create communal tension and hate mongering across the country. More than 600 communal clashes in UP during the first nine weeks of Modi rule and the recent attacks on  Muslims in Bawana and Trilokpuri in Delhi are glaring examples of their nefarious plan. Hindutva forces have also attacked anti-communal programmes in Patna, Pune and Lucknow. The state under the leadership of Modi is not only a silent spectator of communal violence perpetrated by Hindutva forces but is culpable of the crime. Authoritarian Modi government is also preparing the ground to crackdown on all shades of people’s movement.

The challenge before the secular, democratic and pro-people forces of the country is grave and manifold. We are organizing a ‘Sampradayikta Virodhi March’ (Anti-communal March) from Mandi House to Jantar Mantar, Delhi on 6th December, 2014. We are gathering at Mandi house at 11 AM.  Let us come together and resolve to organize a broad-based resistance against the offensive of communal Hindutva forces.

We, earnestly appeal to all secular, democratic and pro-people organizations and individuals to participate in the Joint March. Please bring your own banners, leaflets, placards and make the March a grand success. Please endorse our Joint Appeal and circulate it widely.

Hoping for positive response.

We, the Undersigned:

1. All India Students Association (AISA)
2. All India Federation of Trade Unions (AIFTU)
3. Democratic Students Union (DSU)
4. Inkalabi Majdur Kendra (IMK)
5. Morcha (Magazine)
6. Majdur Patrika
7. Nowruz
8. Parivartankami Chhatra Sangthan (PACHHAS)
9. People’s Democratic Front of India (PDFI)
10. Pragatisheel Mahila Ekta Kendra
11. Pratidhwani
12. Revolutionary Cultural Front (RCF)
13. Students For Resistance (SFR)
14. Sanhati, Delhi
15. Viplav Sanskritik Manch (VSM)

November 24, 2014

छत्तीसग़ढ: नसबंदी के दौरान हुई मौतों के विरोध में प्रदर्शन

प्रगतिशील महिला एकता केंद्र ने अन्य प्रगतिशील व जनवादी संगठनों के साथ मिलकर बिलासपुर, छत्तीसग़ढ में महिलाओं की नसबंदी के दौरान हुई मौतों के विरोध में प्रदर्शन किया जिसमें वक्ताओं ने सरकार की जनसँख्या नियंत्रण की गरीब, मज़दूर एवं महिला विरोधी नीति का विरोध किया तथा उसमें परिवर्तन की मांग की। वक्ताओं ने कहा की बिलासपुर में हुयी मौतों के लिए प्रशासन व उसकी स्वास्थय सम्बन्धी नीतियों  को जिम्मेदार बताया। वक्ताओं ने इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रदर्शन के लिए आये प्रदर्शनकारियों की विडिओ रिकॉर्डिंग करने को लेकर सवाल उठाये। उन्होंने कहा की प्रशासन द्वारा प्रदर्शनकारियों की विडिओ रिकॉर्डिंग  कराना, लाशों के बीच मंत्रियों का ठहाके लगाना बिलासपुर में हुयी मौतों पर छत्तीसगढ़ सरकार व उसके मंत्रिओं की संवेदनहीनता को दिखाती है।           
















November 17, 2014

आंदोलनकारियों व सामाजिक कार्यकताओं पर फर्जी मुकदमों के विरोध में कोटद्वार तहसील में 3 दिवसीय धरना

  1.  कोटद्वार, पौड़ी गढ़वाल में धामदर आंदोलन में ग्रामीणों के खिलाफ लगे मुकदमों को वापस लेने के लिए आंदोलनकारियोंओ सामाजिक कार्यकताओं के द्वारा आंदोलन चलाया गया।  जिसमें ग्रामीणों पर लगे मुकदमों को प्रशासन द्वारा जनदवाब में वापस ले लिया लेकिन  प्रशासन  ने आंदोलनकारियों व  सामाजिक कार्यकताओं पर फर्जी मुक़दमे लगा  दिए।  जिसके विरोध में  प्रगतिशील महिला एकता केंद्र,  परिवर्तनकामी छात्र संगठन के  कार्यकर्ताओं  व जन अधिकार संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा कोटद्वार तहसील में  3  दिवसीय धरना दिया गया, जिसमें  अन्य जनवादी लोगों ने भी  भागीदारी की।  संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा सभा को सम्बोधित किया गया।  जिसमें लोगों ने प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई को गलत व लोकतंत्र द्वारा प्राप्त जनवादी अधिकारों के खिलाफ बताया गया।  इसके अलावा कोटद्वार की बार कौंसिल ने  भी धरने का समर्थन किया।   

साम्प्रदायिकता के खिलाफ कौमी एकता रैली

प्रगतिशील महिला एकता केंद्र द्वारा परिवर्तनकामी छात्र संगठन व इंकलाबी मज़दूर केंद्र के साथ मिलकर दिल्ली की मज़दूर बस्ती शाहबाद डेरी में साम्प्रदायिकता  के खिलाफ कौमी एकता रैली निकली गई। रैली में  " साम्प्रदायिकता के खिलाफ एक हो"  पर्चा भी बांटा गया।  बस्ती  के अमन पसंद लोगों ने भी रैली में भागीदारी की।  कौमी एकता रैली की तस्वीरें ये है - साम्प्रदायिकता के खिलाफ अभियान का हिस्सा बनें। 





August 6, 2014

प्रथम विश्व युद्ध की सौवीं बरसी पर

प्रथम विश्व युद्ध की सौवीं बरसी पर प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र द्वारा अन्य संगठनों के साथ मिल कर दिल्ली व उत्तराखण्ड में संयुक्त कार्यक्रम किये गये। जिसमें वक्ताओं ने प्रथम विश्व युद्ध के कारणों, भयावयता, युद्ध के कारण हुई मानवीय क्षति आदि विषयों पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि युद्ध किस तरह मजदूर मेहनतकश वर्ग के लोगों को तबाह और बर्बाद करते हैं। वक्ताओं ने यह भी बताया कि अमेरिकी साम्राज्यवादियों ने प्रथम विश्व युद्ध के समय विनाशक हथियारों का व्यापार कर इस घृणित युद्ध को और बढ़ा दिया। अमेरिका ने ही प्रथम विश्व युद्ध के समय जापान के हीरोशिमा व नागासाकी पर परमाणु बम गिराये थे उन्होंने यह भी बताया कि वही अमेरिका अब भी सबसे बड़े पैमाने पर हथियारों का व्यापार करता है और विश्व शांति का बहाना बनाकर दूसरे देशों पर युद्ध थोपता है।

वक्ताओं ने बताया कि प्रथम विश्व युद्ध के समय रूस के मजदूर वर्ग ने लेनिन के नेतृत्व में माक्र्सवादी विचारधारा को अपनाते हुए रूस में क्रांति कर दी और वहां मजदूर वर्ग सत्ता पर काबिज हो गया। द्वितीय विश्व युद्ध ने पूर्वी यूरोप के कई देशों समेत वियतनाम, कोरिया व चीन में समाजवाद कायम किया। अब यदि साम्राज्यवादी कभी बड़े पैमाने का आपसी युद्ध या तीसरा विश्व युद्ध शुरु करते हैं तो उसका केवल एक परिणाम निकलेगा- वैश्विक क्रांति और सारी दुनिया से पूंजीवाद, साम्राज्यवाद का सफाया। नया विश्व युद्ध पूंजीवाद-साम्राज्यवाद की कब्र साबित होगा।

साम्राज्यवादियों का घृणित पेशा है युद्ध

प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत के अब पूरे सौ वर्ष बीत चुके हैं। यह युद्ध दुनिया के एक बड़े हिस्से में लड़ा गया और दुनिया की सारी बड़ी शक्तियों ने इसमें भाग लिया। यह युद्ध अपनी नृशंसता और तबाही में अप्रतिम था। ऐसा दुनिया ने अभी तक नहीं देखा था। इसमें नये-नये हथियार और यंत्र इस्तेमाल किये गये। टैंक, हवाई जहाज, रासायनिक गैस इत्यादि इसमें आते हैं। बहुत बड़े पैमाने के विध्वंस के साथ इसमें मानव क्षति भी पहले के मुकाबले अकल्पनीय थी। इसमें करीब एक करोड़ लोग मारे गये और पांच करोड़ लोग घायल हुए। यह यु़द्ध हर मायने में इतना नया और विध्वंसक था कि लोगों को इसे सही मायने में समझ पाने में ही सालों लग गये। पांच साल की भयंकर तबाही के बाद जब युद्ध समाप्त हुआ और इसी बीच रूस के मजदूर वर्ग ने लेनिन के नेतृत्व में माक्र्सवादी विचारधारा को अपनाते हुए रूस में क्रांति कर दी और वहां मजदूर वर्ग सत्ता पर काबिज हो गया।

द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति पर एक नयी ताकत दुनिया के दृश्य पटल पर आई। यह थी समाजवादी खेमे की मौजूदगी। यदि प्रथम विश्व युद्ध ने रूस में क्रांति को जन्म दिया था तो द्वितीय विश्व युद्ध ने पूर्वी यूरोप के कई देशों समेत वियतनाम, कोरिया व चीन में समाजवाद कायम किया। इस समाजवादी खेमे और अन्य देशों में कम्युनिस्ट पार्टियों ने इतनी ताकत हासिल की कि 1950 के दशक में वास्तव में पूंजीवादी-साम्राज्यवादी अपनी व्यवस्था के खात्मे को लेकर भयभीत हो गये।

इतिहास हमें यह बताता है कि यदि साम्राज्यवादी कभी बड़े पैमाने का आपसी युद्ध या तीसरा विश्व युद्ध शुरु करते हैं तो उसका केवल एक परिणाम निकलेगा- वैश्विक क्रांति और सारी दुनिया से पूंजीवाद, साम्राज्यवाद का सफाया। इसलिए किसी नये विश्व युद्ध का हर स्तर पर तत्परता से विरोध करते हुए भी मजदूर वर्ग को इससे भयभीत होने की जरूरत नहीं है। यह पूंजीवाद-साम्राज्यवाद की कब्र साबित होगा।

July 22, 2014

"महिला आंदोलन की चुनौतियां" विषय पर सेमिनार

 
प्रिय साथी,


 
प्रगतिशील महिला एकता केंद्र महिला आंदोलन की चुनौतियां विषय पर दिल्ली में एक सेमिनार का आयोजन कर रहा है। इस सेमिनार में आप सादर आमंत्रित हैं ।



           कार्यक्रम : सेमिनार
विषय    :  "महिला आंदोलन की चुनौतियां"
स्थान     :  गांधी शांति प्रतिष्ठान (जीपीएफ), आई टी ओ के                               निकट, दिल्ली
 दिनांक    : 24 अगस्त 2014
समय      :  प्रातः 10 बजे से सायं 5 बजे तक
 
कार्यक्रम संबंधित किसी भी जानकारी के लिए आप निम्न फोन नम्बरों पर संपर्क  कर सकते हैं -
 
8802183470 (सीमा)
8130947359 (ऋचा)
 
क्रांतिकारी अभिवादन सहित

June 16, 2014

अपने संघर्षो को पूंजीवादी-सामंतवादी गठजोड़ के खिलाफ लक्षित करो!

उत्तर प्रदेश में लगातार महिलाओं के खिलाफ हिंसा व यौन अपराध की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। एक घटना भूलती नहीं कि दूसरी घटना घट जाती है। महिलाओं के खिलाफ बढ़ने वाली हिंसा व यौन अपराध की बेतहाशा बढ़ती घटनाओं ने उत्तर प्रदेश के नेता जी मुलायम सिंह यादव का बयान  "लड़के हैं लड़कों से गलतियां हो जाती हैं" तथा "यदि हम सत्ता में आये तो बलात्कारियों की सजा कम करेंगे" की घोषणा अपना रंग दिखने लगी है। ऐसा नहीं की अन्य हिस्सों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा नहीं हो रही है बल्कि पूरे देश व समाज में ही महिलाओं के खिलाफ हिंसा व यौन अपराध की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
      विगत 28 मई को यूपी के बदायूं जिले में दो नाबालिग बहनों की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गयी। मानवता को प्यार करने वाला शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा, जिसका अखबारों में पेड़ से लटकती लाशों की तस्वीरों को देखकर दिल ना दहला हो।

      जनदवाब के चलते यूपी सरकार ने आरोपियों को गिरफतार व तीन पुलिस कर्मियों को निलंबित कर रस्म अदायगी कर दी है। 16 दिसम्बर रेपकाण्ड के बाद भी आरोपियों को गिरफतार कर लिया गया था और महिला हिंसा को रोकने के लिए कड़े कानून भी बनाए गए थे। परन्तु सच्चाई ठीक इसके उल्टी है। महिला हिंसा से जुड़े मामले घटने के बजाए लगातार बढ़ रहे हैं।

     हरियाणा की चार दलित लड़कियों के साथ बलात्कार के विरोध में लड़कियों को न्याय दिलाने के लिए उनके परिजन 16 अप्रैल से धरने पर बैठे हैं।  उनको न्याय का दिलासा भी  राज्य सरकार ने नहीं दिया था कि  तब तक और दो अन्य दलित लडकियों के साथ बलात्कार कर हत्या की घटना ने देश में महिलाओं की  स्थिति के सम्बन्ध में सवाल खड़ा कर दिया है। दरअसल बात यह है कि आजाद भारत में भी गरीब, दलित, शोषितों व महिलाओं की सामाजिक व आर्थिक स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है. समाज में महिलाओं को पुरुष की संपत्ति समझे जाने का ही परिणाम है कि अक्सर ही एक दूसरों को नीचा दिखने व बदला लेने के लिए महिलाओं के साथ बलात्कार किया जाता है. ये जातिगत दंगे हों या सांप्रदायिक दंगे हों या युद्ध ही क्यों न हो इन सब में महिलाएं और बच्चे आसान शिकार होते हैं।

June 3, 2014

घृणास्पद पूंजीवादी-सामंतवादी गठजोड़ को ख़त्म करने के लिए प्रगतिशील क्रन्तिकारी संघर्षों को विकसित करो!

हरियाण के हिसार जिले के भगाना गांव में चार नाबालिग दलित लडकियों का बलात्कार की घटना ने एक बार फिर देश में दलितों व उनकी महिलाओं के स्थिति के सम्बन्ध में सवाल खड़ा कर दिया है. दलित जाती की महिलाओं के साथ होने वाली ये कोई अकेली या अनोखी घटना नहीं है. लेकिन यह तथा इस तरह की घटनाएँ ये बताती हैं कि आजादी के 65 से भी ज्यादा वक़्त बीत जाने के बाद भी बहुलांश दलित आबादी की सामाजिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है. समाज में महिलाओं को पुरुष की संपत्ति समझे जाने का ही परिणाम है कि अक्सर ही एक दूसरों को नीचा दिखने व बदला लेने के लिए महिलाओं के साथ बलात्कार किया जाता है. ये जातिगत दंगे (खैरलांजी, मिर्चपुर और अब भागना), सांप्रदायिक दंगे (भारत विभाजन, गुजरात, मुजफ्फरपुर) हों या युद्ध इन सब में महिलाएं और बच्चे आसान शिकार होते हैं और दूसरों को नीचे दिखने का कारगर हथियार। हमारा मानना है की जब तक महिलाओं को पुरुषों की संपत्ति, घर की इज्जत के साथ जोड़कर देखा जाता रहेगा, पूंजीवादी-सामंतवादी गठजोड़ कायम रहेगा तब तक महिलाओं की स्थिति में कोई सकारात्मक परिवर्तन नहीं हो सकता। इसके लिए जरुरी है कि इस घृणास्पद पूंजीवादी-सामंतवादी गठजोड़ को ख़त्म  करने के लिए प्रगतिशील क्रन्तिकारी संघर्षों को विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ें।  

January 24, 2014

पाश्विकता की सीमा

 पश्चिम बंगाल के सिंहभूम जिले में 20वर्षीय लड़की को प्रेम प्रसंग होने की वजह से दंडित करते हुए वहां कि खाप पंचायत के 12 सदस्यों ने उस लड़की के साथ बलात्कार किया। बर्बरता और पाश्विकता की सभी हदें तोड़ता  खाप पंचायतों का यह कृत्य इस बात को परिलक्षित करता है कि कैसे महिला सशक्तीकरण के तमाम दावें करती यह व्यवस्था आज भी खाप पंचायतों को पनपने दे रही है और महिलाओं को इसका शिकार बनने पर मजबूर कर रही है। बालिग होने और प्रेम कर सकने के जनवादी अधिकार की बात तो बहुत दूर की है महिलाओं के साथ मानवीय व्यवहार की उम्मीद भी इस घटना के बाद खत्म हो जाती है।
मुनाफे पर टिके इस समाज में भले ही राज व्यवयस्था ने मुनाफे की बढ़ोत्तरी के लिए महिलाओं को घरों से निकाल दिया है लेकिन मूल्यों के स्तर पर आज भी यह व्यवस्था महिलाओं के लिए वही सड़ी-गली मान्यताओं को बनाकर रखे हुए है। खाप पंचायतों का इस तरह से खुले-आम हत्याएं करने और महिलाओं के जनवादी अधिकारों का हनन करने के बावजूद बने रहना यह साफ दिखाता है कि यह व्यवस्था उनको पनपने का मौका दे रही है।
प्रगतिशील महिला एकता केंद्र इस घटना की भर्तस्ना करता है और सभी महिलाओं का आह्ववान करता है कि वह आगे आकर एकजुट हों और महिलाओं के साथ हो रहे इस अत्याचार और शोषण के विरुद्ध संघर्ष की धार को तेज करें।

इंकलाब जिंदाबाद!

January 20, 2014

"आप" पार्टी के मंत्री की खुली गुंडागर्दी

खुद को आम आदमी की सरकार बताती केजरीवाल एंड कंपनी भले ही अभी तक जनता को किए गए वादों को पूरा करना तो दूर अपनी तथाकथित जनता दरबार से निकल भागने और डींगे हांकने के अलावा कुछ और न कर पाई हो लेकिंन उनके मंत्रियों ने अपना शक्ति प्रदर्शन शुरु कर दिया है।
नैतिकता के ठेकेदार बने आप पार्टी के कानून मंत्री सोमनाथ भारती ने पिछले दिनों आधी रात को कुछ अफ्रीकी महिलाओं पर वेश्यावृत्ति और नशाखोरी का आरोप लगाते हुए सादी वर्दी में आई पुलिस द्वारा महिलाओं की पिटाई करवाई और डाक्टरी जांच के लिए सार्वजनिक तौर पर पेशाब करने को मजबूर किया। सोमनाथ भारती ने उन महिलाओं पर नस्लीय टिप्पणियां भी कीं। यही नहीं एम्स में इन महिलाओं की जांच के दौरान सोमनाथ भारती खुद वहां पर मौजूद रहे।
दिल्ली सचिवालय के बाहर इस भीषण ठंड में बैठे गेस्ट शिक्षकों की शिकायतों को सुनने का आप पार्टी की सरकार के पास भले ही समय न हो किंतु उनके मंत्रियों के पास इस तरह की नीचतापूर्ण और घृणित कार्य करने के लिए पूरा समय भी और अवसर भी है। अपने खोखले वादों और डींगों के दम पर गठित इस सरकार की पोल अब धीरे-धीरे जनता के सामने खुल रही है। खुद को सबसे ईमानदार राजनीतिज्ञ घोषित करने वाले ये जनता के ठेकेदार अपने इन घृणित कृत्यों से खुद ही जनता के सामने बेनकाब हो रहे हैं।
प्रगतिशील महिला एकता केंद्र मांग करता है कि सोमनाथ भारती तत्काल मंत्री पद से हटाया जाए और इन महिलाओं के साथ की गई बदसलूकी और उत्पीड़न के लिए उन्हें दंडित किया जाए।
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