September 9, 2026

सत्य निकेतन: हादसा नहीं व्यवस्था द्वारा की गई हत्याएं

देश की राजधानी दिल्ली में रविवार को एक बहुत ही दुखद घटना हुई। रविवार
6 सितम्बर को डीयू के पास सत्य निकेतन इलाके में एक 6 मंजिला इमारत ढह गई। इस जर्जर इमारत में बॉयज (boys) पीजी चल रहा था।  इमारत ढहने से मलबे में दबकर लगभग 6 छात्रों और 1 मजदूर की मौत हो गई तथा कई छात्र गंभीर रूप से घायल है। अभी भी कुछ की मलबे में दबे होने की आशंका है।

पहले से जर्जर इमारत के बेसमेंट में इमारत को रिपेयर कराने का काम चल रहा था। ऐसा बताया जा रहा है कि नींव कमजोर होने की बजह से इमारत ढह गई। ऐसा भी बताया जा रहा है कि पीजी के मालिक ने छात्रों से लिखवा रखा था कि किसी भी अनहोनी के लिए वह जिम्मेदार नहीं होगा। यानी इमारत की स्थिति का मालिक को पहले से पता था लेकिन वह फिर भी पैसों के लालच में छात्रों को वहां रख रहा था।

यह इलाका नगर निगम के अंतर्गत आता है। इस जैसी जर्जर इमारत में पीजी, कोचिंग सेंटर आदि चलाए जाते हैं। न तो इन इमारतों पर नगर निगम आपत्ति जताता है और न ही दिल्ली प्रशासन कोई आपत्ति जताता है। जब कोई घटना हो जाती है तब उस इमारत के मालिक या फिर छोटे अफसरों पर छोटी मोटी कार्यवाही कर काम खत्म हो जाता है जैसे इस घटना में भी हुआ।

दिल्ली में यह कोई पहली घटना नहीं है इससे पहले एक इमारत में आग लगने के कारण छात्रों की मौत हुई थी और उससे पहले भी कई इमारत ढह गई जिनमें लोगों की मौत हुई।

केंद्र सरकार हो या विभिन्न राज्य सरकारें, सभी शिक्षा पर बजट में लगातार कटौती कर रही हैं। इसके परिणामस्वरुप जरुरत के अनुरुप हॉस्टलों का निर्माण नहीं हो रहा है और किरायाजीवी माफिया, भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत से मापदंडों को पूरा किये बिना न सिर्फ ऊंची इमारतें बना रहे हैं बल्कि जर्ज़र हो चुकी इमारतों को भी पीजी के रूप में चला रहे हैं। पैसा बनाने की हवस में वे छात्रों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जबकि सरकारें जांच कमेटियां बनाकर लीपापोती कर रही हैं।

निजीकरण की नीतियों ने देश में शिक्षा की सरकारी व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। भयंकर बेरोजगारी के इस दौर में छोटे शहरों, कस्बों और गाँवों से छात्र अच्छी शिक्षा पाने और भविष्य के सपनों के साथ महानगरों की ओर रुख करने पर मज़बूर हैं। इसका फायदा उठाते हुये इन महानगरों में किरायाजीवी माफिया छात्रों को बुरी तरह लूट-खसोट रहे हैं, क्योंकि बाहर से आने वाले छात्रों के लिये कॉलेजों में हॉस्टलों की संख्या बहुत ही कम है। राजधानी दिल्ली में पढ़ रहे कई लाख छात्रों पर हॉस्टलों की संख्या मात्र कुछ हज़ार है।

 प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र का स्पष्ट कहना है कि असल में ये कोई दुर्घटना नहीं बल्कि शिक्षा की बदहाल व्यवस्था और भ्रष्ट पूंजीवादी तंत्र के द्वारा की गई हत्यायें हैं। प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र की मांग है कि इस घटना में मारे गये छात्रों एवं अन्य नागरिकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रु. मुआवजा दिये जाने एवं सभी के एक परिजन को सरकारी नौकरी दिये जानी चाहिए।

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