April 15, 2026

गुडगाँव, मानेसर, फरीदाबाद व नोएडा में वेतन वृद्धि को लेकर चल रहे आंदोलन के समर्थन में

अप्रैल की शुरुआत में गुड़गांव से शुरू हुआ मजदूरों का आंदोलन अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ता जा रहा है। गुडगाँव मानेसर, फरीदाबाद तथा नोएडा में मजदूर अपने वेतन बढ़ोतरी व कार्य परिस्थितियों में सुधार के लिए आंदोलन कर रहे हैं। मजदूर न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपए करने, कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने व ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगाने आदि मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन व मालिक, मजदूरों की मांगों को पूरा करने के बजाय उनका दमन कर रहा है। उन पर लाठी चार्ज कर रहे है, उनको गिरफ्तार कर रहे हैं। आंदोलन का समर्थन करने आ रहे मजदूर नेताओं को फर्जी मुकदमे लगा कर उनके घरों से गिरफ्तार कर जेल में डाल रहे हैं।

गुडगाँव मानेसर औद्योगिक इलाके में 2 अप्रैल से होंडा के ठेका मजदूरों का वेतन बढ़ोतरी को लेकर आंदोलन शुरू हुआ था। 3 अप्रैल को श्रम विभाग व पुलिस प्रशासन की माध्यस्था में ठेका मजदूरों का समझौता सम्पन्न हुआ। उसके बाद 4 अप्रैल को मुंजाल शोवा व सत्यम फैक्ट्री के ठेका मजदूर वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर आंदोलन करने लगे। 6 अप्रैल को रूप पोलिमर व अन्य फैक्ट्री के ठेका मजदूर काम बंद कर हड़ताल पर आ गए। 7 अप्रैल को गारमेंट क्षेत्र की दो फैक्ट्री रिको व मॉडलामा के मजदूर वेतन बढ़ोतरी व अन्य कानूनी मांगो के साथ हड़ताल कर मानेसर तहसील में धरना देने लगे। मानेसर तहसील में चार फैक्ट्रियों के मजदूर अपनी मांगो के लिये धरना दे रहे थे। जिसमें मुंजाल, सत्यम, रूपा पोलिमर व रिको फैक्ट्री के मजदूर शामिल थे,

7 अप्रैल को दिन भर प्रशासन और मजदूर प्रतिनिधि के बीच वार्ता चलती रही। देर शाम प्रशासन मजदूर प्रतिनिधियों को डरा-धमका कर समझौता करने का दबाव बनाता रहा। अंत में प्रशासन ने मजदूरों को रात होने पर तितर-बितर कर कहा कि आपका समझौता हो गया। लिखित में कंपनी में होगा। क्या समझौता हुआ, किन मांगो पर समझौता हुआ यह बताने की बजाय पुलिस-प्रशासन ने मजदूरों का दमन करना शुरू कर दिया।
पुलिस के दमन के बाद भी 8 अप्रैल को सिरमा एस जी एस व रिचा ग्लोबल के ठेका मजदूर भी हड़ताल पर आ गये। मजदूरों के इन संघर्षो के सामने हरियाणा सरकार को झुकना पडा। और न्यूनतम वेतनमान में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी करनी पड़ी।
9 अप्रैल को आई एम टी मानेसर में पुलिस ने मजदूरों पर लाठी चार्ज कर एक भगदड़ की स्थिति बना दी और उसके बाद उल्टा मजदूरों पर तोड़फोड़ और उपद्रव का आरोप लगाते हुए मज़दूरों का दमन किया। जिसमें कई मजदूरों को गंभीर चोटें आईं और कितने ही मजदूरों को गिरफ्तार किया गया।
12 अप्रैल की रात मुंजाल शोवा के मजदूर प्रतिनिधि आकाश व इंकलाबी मजदूर केंद्र के कार्यकर्ता श्यामवीर, राजू, हरीश व बेलसोनिका यूनियन के महासचिव अजीत व कोषाध्यक्ष पिंटू को गिरफ्तार कर लिया। इन मजदूर नेताओं पर 9 अप्रैल की घटना को लेके फर्जी मुकदमे लगा कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में डाल दिया।
इन छह मजदूर नेताओं के साथ 55 मजदूरों पर हत्या के प्रयास, आगजनी जैसी झूठी धाराएं लगाकर उनको जेल में ठूंस दिया गया है।
इसके बाद फरीदाबाद व नोएडा में मजदूर स्वत: स्फूर्त कंपनी से बाहर हड़ताल पर आ गए। इतने लंबे समय से मजदूर कंपनियों में कम कर रहे हैं, लेकिन मजदूरों से 8 से 12 घंटे काम कराया जा रहा है और वेतन 10 हजार से 15 हजार रुपए दिया जा रहा है। महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। कमरे के किराए से लेकर खाना, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य आदि सब महंगे होते जा रहे है। और जब से देश में गैस का संकट पैदा हुआ है तब से 400-500 रुपए किलो गैस मिल रही है। इससे खाने का ही संकट पैदा हो गया है।

सरकार ने 1 अप्रैल से कंपनी मालिकों का मुनाफा बढ़ाने के लिए मजदूर विरोधी 4 श्रम संहिताएं लागू कर दी है, महिलाओं से रात की पाली में काम का कानून लागू कर दिया है। लेकिन सरकार मजदूरी बढ़ाने को तैयार नहीं है।

जब ये मजदूरों स्वतः स्फूर्त आंदोलन कर जो रोटी मांग रहे है, वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। तब शासन-प्रशासन व फैक्ट्री मालिक कह रहा है कि मजदूरों को बाहरी लोग (कभी पाकिस्तानी कभी कम्युनिस्ट) भड़का रहे है। असल में बाहरी लोगों का नाम लेकर पुलिस प्रशासन ठेका मजदूरों के आंदोलन का दमन करना चाहता है। इन आंदोलनों का समर्थन करने वाले मजदूर संगठनों, नेताओं व व्यक्तियों का दमन करना चाहता है। 14 अप्रैल को नोएडा से लगभग 300 मजदूरों को गिरफ्तार किया गया।
प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र मजदूर आंदोलन का समर्थन करता है और शासन-प्रशासन मजदूर आंदोलन का दमन व मजदूरों तथा मजदूर नेताओं पर फर्जी मुकदमे लगा गिरफ्तार करने की आलोचना करता है।
प्रगतिशील महिला एकता केंद्र मांग करता है कि:
👉मजदूर विरोधी चार लेबर कोड्स रद्द किये जाये।
👉स्थायी प्रकृति के काम करने वाले ठेका मजदूरों को स्थायी किया जाये।
👉समान काम का समान वेतन दिया जाये।
👉न्यूनतम वेतन 30 हजार घोषित किया जाये।
👉ठेका प्रथा को समाप्त किया जाये।
👉एफ टी ई, नीम, कैजुअल , ट्रेनी के नाम पर युवाओं का शोषण करना बंद किया जाये।
इंकलाब जिंदाबाद!
क्रांतिकारी अभिवादन समेत
प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की केंद्रीय कमेटी द्वारा जारी
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