प्रगतिशील महिला एकता केंद्र
एकता! संघर्ष!! मुक्ति!!!
October 23, 2026
मजदूर नेताओं पर फर्जी गुंडा एक्ट लगा जिला बदर करने का विरोध करो
September 9, 2026
सत्य निकेतन: हादसा नहीं व्यवस्था द्वारा की गई हत्याएं
पहले से जर्जर इमारत के बेसमेंट में इमारत को रिपेयर कराने का काम चल रहा था।
ऐसा बताया जा रहा है कि नींव कमजोर होने की बजह से इमारत ढह गई। ऐसा भी बताया जा
रहा है कि पीजी के मालिक ने छात्रों से लिखवा रखा था कि किसी भी अनहोनी के लिए वह
जिम्मेदार नहीं होगा। यानी इमारत की स्थिति का मालिक को पहले से पता था लेकिन वह
फिर भी पैसों के लालच में छात्रों को वहां रख रहा था।
यह इलाका नगर निगम के अंतर्गत आता है। इस जैसी जर्जर इमारत में पीजी, कोचिंग सेंटर आदि चलाए जाते हैं। न तो इन इमारतों पर नगर
निगम आपत्ति जताता है और न ही दिल्ली प्रशासन कोई आपत्ति जताता है। जब कोई घटना हो
जाती है तब उस इमारत के मालिक या फिर छोटे अफसरों पर छोटी मोटी कार्यवाही कर काम
खत्म हो जाता है जैसे इस घटना में भी हुआ।
दिल्ली में यह कोई पहली घटना नहीं है इससे पहले एक इमारत में आग लगने के कारण
छात्रों की मौत हुई थी और उससे पहले भी कई इमारत ढह गई जिनमें लोगों की मौत हुई।
केंद्र सरकार हो या विभिन्न राज्य सरकारें, सभी शिक्षा पर बजट में लगातार कटौती कर रही हैं। इसके
परिणामस्वरुप जरुरत के अनुरुप हॉस्टलों का निर्माण नहीं हो रहा है और किरायाजीवी
माफिया, भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र
की मिलीभगत से मापदंडों को पूरा किये बिना न सिर्फ ऊंची इमारतें बना रहे हैं बल्कि
जर्ज़र हो चुकी इमारतों को भी पीजी के रूप में चला रहे हैं। पैसा बनाने की हवस में
वे छात्रों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जबकि सरकारें जांच कमेटियां बनाकर लीपापोती कर रही हैं।
निजीकरण की नीतियों ने देश में शिक्षा की सरकारी व्यवस्था को बर्बाद कर दिया
है। भयंकर बेरोजगारी के इस दौर में छोटे शहरों, कस्बों और गाँवों से छात्र अच्छी शिक्षा पाने और भविष्य के
सपनों के साथ महानगरों की ओर रुख करने पर मज़बूर हैं। इसका फायदा उठाते हुये इन
महानगरों में किरायाजीवी माफिया छात्रों को बुरी तरह लूट-खसोट रहे हैं, क्योंकि बाहर से आने वाले छात्रों के लिये कॉलेजों में
हॉस्टलों की संख्या बहुत ही कम है। राजधानी दिल्ली में पढ़ रहे कई लाख छात्रों पर
हॉस्टलों की संख्या मात्र कुछ हज़ार है।
प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र का स्पष्ट कहना है कि असल में ये कोई दुर्घटना नहीं बल्कि शिक्षा की बदहाल व्यवस्था और भ्रष्ट पूंजीवादी तंत्र के द्वारा की गई हत्यायें हैं। प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र की मांग है कि इस घटना में मारे गये छात्रों एवं अन्य नागरिकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रु. मुआवजा दिये जाने एवं सभी के एक परिजन को सरकारी नौकरी दिये जानी चाहिए।
April 15, 2026
गुडगाँव, मानेसर, फरीदाबाद व नोएडा में वेतन वृद्धि को लेकर चल रहे आंदोलन के समर्थन में
March 2, 2026
ईरान पर अमरीकी साम्राज्यवादियों तथा इजरायल द्वारा किए गए हमले का विरोध करो
28 फरवरी को अमेरिका व इजरायल ने ईरान पर हमला बोल दिया। अमेरिकी साम्राज्यवादियों ने आपरेशन इपिक फ्यूरी नामक इस हमले का उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियारों से वंचित करना बताया है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने कई मिसाइली हमले रिहायशी इलाकों, स्कूलों व ईरानी नेताओं के आवास को निशाना बनाते हुए किए। इन हमलों में ईरान के शीर्ष नेता खामेनेई मारे गये। एक मिसाइल हमले में ईरान में 53 स्कूली बच्चों के मारे जाने की खबर है। प्रत्युत्तर में ईरान ने भी इजरायल व 8 अरब देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाते हुए हमला बोला है।
ईरान पर यह हमला अमेरिकी
साम्राज्यवादियों द्वारा अपने वर्चस्व को कायम करने की तरफ एक और कदम है। इससे
पहले अमेरिका वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार कर वेनेजुएला की संप्रभुता को
नष्ट करने का काम किया है। ईराक तथा अफगानिस्तान पर परमाणु हथियारों के होने का
झूठा आरोप लगा कर उन पर हमले किए। उन देशों को बर्बाद करके उन्हें सैकड़ों साल
पीछे धकेल दिया। आज फिर अपनी चौधराहट को बरकरार रखने के लिए परमाणु हथियारों का
वही आरोप लगा कर ईरान पर हमला कर रहा है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने हमले के बाद
एक ओर ईरानी हुकूमत को 10 दिन के भीतर अमेरिकी मांगों को
स्वीकारने का अल्टीमेटम दिया। वहीं दूसरी ओर उसने ईरानी जनता से तख्तापलट करने का
आह्वान करते हुए कहा कि उनकी आजादी नजदीक है और उन्हें सरकार पलटने का ऐसा मौका
लम्बे वक्त तक नहीं मिलेगा। स्पष्ट है कि अमेरिकी साम्राज्यवादी किसी भी कीमत पर
खामेनेई हुकूमत को अपदस्थ करना चाहते हैं, ताकि अमेरिकी साम्राज्यवादी
अपने मन मुताबिक वहां के तेल व अन्य खनिज संपदाओं की लूट का प्रभुत्व प्राप्त कर
सकें। ईरान में परमाणु हथियार होना तो महज एक बहाना है।
आज दुनिया भर में साम्राज्यवादी
शक्तियां अन्य देशों पर हमला कर अपने वर्चस्व को बढ़ाने की होड़ में लगी है। जबकि
वहीं दूसरी तरफ इन देशों की आम मज़दूर मेहनतकश जनता इन युद्धों में बेवजह तबाह
बर्बाद और मारी जाती है। चाहे यमन हो या यूक्रेन हो या फिलीस्तीन या ईरान हर जगह
आम जनता युद्धों के दौरान न सिर्फ अपनी जान गंवाती है, बल्कि युद्ध के दौरान पैदा हुए संकटों की शिकार होती है
जिसमें महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा इसके शिकार होते है।
पूरी दुनिया में साम्राज्यवादी
ताकतों द्वारा किए जा रहे इन हमलों पर रोक दुनिया की मज़दूर मेहनतकश आबादी ही लगा
सकती है। मजदूर मेहनतकश जनता द्वारा खड़ा किया गया सशक्त विद्रोह ही ना सिर्फ इन
विनाशकारी युद्धों पर लगाम लगाएगा, बल्कि इस पतित व्यव्स्था का अंत
कर एक न्यायपूर्ण समानता पर आधारित मज़दूर राज का निर्माण करेगा जहां युद्ध नहीं
शांति और जीवन होगा।
प्रगतिशील महिला एकता केंद्र
अमरीका और इजरायल द्वारा ईरान की संप्रभुता पर किए इस हमले का पुरजोर विरोध करता
है और साम्राज्यवाद के नाश में मजदूर मेहनतकश जनता के साथ संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध
है।
इंकलाब जिंदाबाद
साम्राज्यवाद मुर्दाबाद
प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की
केंद्रीय कमेटी द्वारा जारी

